कश्मीरियत का ढोल पीटना विशुद्ध बेशर्मी है!
On : --रक्तपिपासु राजनीति और टीआरपी-लोलुप मीडिया मिलकर ऐसे-ऐसे जुमले गढ़ लेते हैं, जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं होता। ऐसा ही एक जुमला है- “कश्मीरियत।” न जाने किस कश्मीरियत का ढोल ये लोग पीटते रहते हैं? कश्मीरियत तो 27 साल पहले उसी दिन…
