कैराना ही नहीं, दादरी भी कानून-व्यवस्था का ही मामला था जहांपनाह!

कैराना ही नहीं, दादरी भी कानून-व्यवस्था का ही मामला था जहांपनाह!

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जातिवादी और सांप्रदायिक नज़रिए से तो अक्सर घटनाओं को जातीय और सांप्रदायिक रंग दिया जा सकता है, क्योंकि अपराधी भी किसी न किसी जाति या मजहब से तो ताल्लुक रखते ही हैं। और तो और, अपराधियों को भी यही सूट करता है…