बेहद भुरभुरी बुनियाद पर खड़ी है हमारे आज के अनेक लेखकों की महानता
On : --इकबाल ने पहले लिखा- मजहब नहीं सिखाता आपस में वैर रखना हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोस्तां हमारा। लेकिन बाद में पता चला कि उसने लिखा भले उपरोक्त था, पर उसके मन में यह था- मजहब हमें सिखाता आपस में वैर रखना…
