राम का काम तो कांग्रेस ने किया, बीजेपी ने केवल राजनीति की!

राम का काम तो कांग्रेस ने किया, बीजेपी ने केवल राजनीति की!

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अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के संबंध में आज एक प्रिय नौजवान से बात हो रही थी। मैंने उससे पूछा कि मन्दिर में पूजा कब से हो रही है? उसने जबाब दिया कि सदियों से। आम लोगों को, खासकर नई पीढ़ी को…

बंटवारे की राजनीति के बीच सभी हिन्दुओं और मुसलमानों से एक बेहद ज़रूरी अपील

बंटवारे की राजनीति के बीच सभी हिन्दुओं और मुसलमानों से एक बेहद ज़रूरी अपील

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बड़े ही अफ़सोस की बात है कि देश में हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच खाई बढ़ती ही जा रही है। कई जगहों पर हिन्दुओं के हाथों मुसलमान मारे जा रहे हैं, तो कई जगहों पर मुसलमानों के हाथों हिन्दू भी मारे जा…

कोर्ट और कांग्रेस का रिश्ता देख याद आ जाती है साधु और बिच्छू की कहानी!

कोर्ट और कांग्रेस का रिश्ता देख याद आ जाती है साधु और बिच्छू की कहानी!

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कांग्रेस ने पहले न्याय और लोकतंत्र का खूब मखौल उड़ाया है, इसका मतलब यह नहीं कि न्याय मांगने और हासिल करने का उसे अधिकार नहीं है। लेकिन उसे हड़बड़ाना नहीं चाहिए और कोर्ट पर पूरा भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि उसके सामने ऐसे…

कर्नाटक का नाटक कहता है- जैसी करनी, वैसी भरनी

कर्नाटक का नाटक कहता है- जैसी करनी, वैसी भरनी

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मौजूदा संवैधानिक स्थिति (जितनी मेरी समझ है) और राजनीतिक शुचिता (यहां पर मेरा मतलब मूलतः हॉर्स ट्रेडिंग रोकने भर से है) के लिहाज से यह बेहतर होता कि बीजेपी कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस की सरकार बनने देती, लेकिन ऐसा लगता है कि बीजेपी…

सांप्रदायिक राजनीति करने में कांग्रेस के सामने बच्ची है बीजेपी!

सांप्रदायिक राजनीति करने में कांग्रेस के सामने बच्ची है बीजेपी!

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बीजेपी बदनाम है, लेकिन सांप्रदायिक राजनीति करने में कांग्रेस के सामने वह आज भी बच्ची है। बीेजेपी हिन्दुओं की दोस्त है कि नहीं- कहना मुश्किल है, लेकिन कांग्रेस हिन्दुओं की दुश्मन है, कर्नाटक में यह बात एक बार फिर से स्पष्ट हो…

बीजेपी के लिए शुभ नही हैं बिहार-यूपी उपचुनाव के नतीजे

बीजेपी के लिए शुभ नही हैं बिहार-यूपी उपचुनाव के नतीजे

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बिहार और यूपी के उपचुनाव नतीजों से साफ़ है कि अगर बीजेपी के खिलाफ़ एक महागठबंधन की छतरी के नीचे अलग-अलग गठबंधन बनते हैं, तो 2019 के लोकसभा चुनाव में उसके लिए राहें आसान नहीं होंगी और अब यह तय है कि…

कैराना ही नहीं, दादरी भी कानून-व्यवस्था का ही मामला था जहांपनाह!

कैराना ही नहीं, दादरी भी कानून-व्यवस्था का ही मामला था जहांपनाह!

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जातिवादी और सांप्रदायिक नज़रिए से तो अक्सर घटनाओं को जातीय और सांप्रदायिक रंग दिया जा सकता है, क्योंकि अपराधी भी किसी न किसी जाति या मजहब से तो ताल्लुक रखते ही हैं। और तो और, अपराधियों को भी यही सूट करता है…