व्यंग्य: जहां न पर मार सके परिंदा, वहां भी पहुंच जाए दरिंदा

व्यंग्य: जहां न पर मार सके परिंदा, वहां भी पहुंच जाए दरिंदा

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‘जहां न पहुंचे रवि, वहां पहुंचे कवि’ वाली कहावत पुरानी हुई। वैसे भी कवि अब वहीं तक पहुंच पाते हैं, जहां तक उन्हें उपकृत-पुरस्कृत करने वाले पहुंचने देते हैं। साथ ही, कवि अब स्वयं भी उन अंधेरी जगहों तक नहीं पहुंचना चाहते,…