बालाकोट एयरस्ट्राइक पर संदेह पैदा करने वाले विपक्षी नेताओं के नाम खुला पत्र

बालाकोट एयरस्ट्राइक पर संदेह पैदा करने वाले विपक्षी नेताओं के नाम खुला पत्र

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मेरे प्यारे विपक्षी नेताओ, बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक में मारे गये आतंकवादियों की संख्या को लेकर आप लोगों को इतना संदेह नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से “उल्टे बांस बरेली को” वाली कहावत के चरितार्थ होने का पूरा-पूरा ख़तरा है। पूछिए, कैसे?…

पीओके अगर भारत का है, तो उसे वापस पाने के लिए भारत क्या कर रहा है?

पीओके अगर भारत का है, तो उसे वापस पाने के लिए भारत क्या कर रहा है?

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फारूख अब्दुल्ला अगर कहते हैं कि पीओके पाकिस्तान का है, तो इसकी आलोचना कीजिए, लेकिन पीओके अगर भारत का है, तो उसे वापस पाने के लिए भारत क्या कर रहा है? ज़रा इसपर भी सोचिएगा। 1965, 1971 और 1999 में तीन युद्ध…

इस्लाम की छवि बचानी है, तो पाकिस्तान जैसे देशों को ख़त्म करना होगा!

इस्लाम की छवि बचानी है, तो पाकिस्तान जैसे देशों को ख़त्म करना होगा!

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परवेज़ मुशर्रफ़ पाकिस्तान के आर्मी चीफ थे, जो तख्तापलट करके पाकिस्तान के राष्ट्रपति बने। उन्होंने आर्मी चीफ़ रहते हुए भारत के करगिल में हमला किया और राष्ट्रपति रहते भारत की संसद पर हमला करवाया। जब वह राष्ट्रपति नहीं रहे, तो अक्टूबर 2015…

30 कड़वे सवाल, जिनपर चिंतन करना मुसलमानों के हित में!

30 कड़वे सवाल, जिनपर चिंतन करना मुसलमानों के हित में!

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हम धर्म से जुड़े प्रसंगों की बजाय जनता के बुनियादी मुद्दों पर बंहस करना चाहते हैं, लेकिन देश और दुनिया का माहौल कुछ ऐसा हो चला है कि बार-बार उन्हीं प्रसंगों पर चर्चा छिड़ जाती है। हामिद अंसारी प्रसंग ने मुझे फिर…

व्यंग्य: जहां न पर मार सके परिंदा, वहां भी पहुंच जाए दरिंदा

व्यंग्य: जहां न पर मार सके परिंदा, वहां भी पहुंच जाए दरिंदा

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‘जहां न पहुंचे रवि, वहां पहुंचे कवि’ वाली कहावत पुरानी हुई। वैसे भी कवि अब वहीं तक पहुंच पाते हैं, जहां तक उन्हें उपकृत-पुरस्कृत करने वाले पहुंचने देते हैं। साथ ही, कवि अब स्वयं भी उन अंधेरी जगहों तक नहीं पहुंचना चाहते,…

कश्मीरियत का ढोल पीटना विशुद्ध बेशर्मी है!

कश्मीरियत का ढोल पीटना विशुद्ध बेशर्मी है!

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रक्तपिपासु राजनीति और टीआरपी-लोलुप मीडिया मिलकर ऐसे-ऐसे जुमले गढ़ लेते हैं, जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं होता। ऐसा ही एक जुमला है- “कश्मीरियत।” न जाने किस कश्मीरियत का ढोल ये लोग पीटते रहते हैं? कश्मीरियत तो 27 साल पहले उसी दिन…

खुला पत्र: महबूबा मुफ्ती जी, दिखाइए तो किस कश्मीरी का माथा शर्म से झुका हुआ है!

खुला पत्र: महबूबा मुफ्ती जी, दिखाइए तो किस कश्मीरी का माथा शर्म से झुका हुआ है!

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आदरणीया महबूबा मुफ्ती जी, जब भी कश्मीर में कोई आतंकी हमला होता है, आपके मुताबिक हर बार कश्मीरियों का सिर शर्म से झुक जाता है। लेकिन हमने तो कश्मीरियों का शर्म से झुका हुआ सिर आज तक नहीं देखा। पहले वहां से…

जो धर्म डराए, जो किताब भ्रम पैदा करे, उसमें सुधार की सख्त ज़रूरत- अभिरंजन कुमार

जो धर्म डराए, जो किताब भ्रम पैदा करे, उसमें सुधार की सख्त ज़रूरत- अभिरंजन कुमार

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जो कट्टरपंथी हैं, वे भी उसी एक किताब से हवाले दे रहे हैं। जो पढ़े-लिखे, उदारवादी और प्रगतिशील हैं, वे भी उसी एक किताब के सहारे सारी थ्योरियां पेश कर रहे हैं। बड़े से बड़ा क्रांतिकारी भी यह कहने की हिम्मत नहीं…