…तो जैसे कृष्ण ने नरकासुर को पीटा, प्रशांत भूषण को मां ने वैसे ही पीटा होता!

आतंकवादियों के कुख्यात वकील और संदिग्ध पाकिस्तानी एजेंट प्रशांत भूषण को जब लगा कि भगवान श्रीकृष्ण के बारे में उनकी कही छिछोरी बातों का मुद्दा तूल पकड़ चुका है और अब उनका हश्र भी कमलेश तिवारी जैसा हो सकता है, जिन्हें पैगम्बर मोहम्मद के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करने के चलते जेल की हवा खानी पड़ी थी, तो वह सीधे अपनी औकात में आ गए। उन्होंने अपना विवादित ट्वीट डिलीट करके माफ़ी मांग ली है। वे लिखते हैं-

I realise that my tweet on Romeo squads &Krishna was inappropriately phrased & unintentionally hurt sentiments of many people. Apologize & delete it. (मुझे महसूस हुआ कि रोमियो दस्ते और कृष्ण के बारे में मेरा ट्वीट सही तरीके से नहीं लिखा गया था, जिससे इरादा नहीं होते हुए भी कई लोगों की भावनाओं को चोट पहुंची है। माफ़ी मांगता हूं और इसे डिलीट करता हूं।)

हालांकि इससे पहले सफ़ाई देते हुए भी प्रशांत भूषण कम हेकड़ी में नहीं थे। दो अलग-अलग ट्वीट्स में उन्होंने अपना दोष भी दूसरों के माथे डाल देने का भरसक प्रयास किया, लेकिन इसमें कामयाब नहीं हुए। पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा-

My tweet on Romeo brigade being distorted. My position is: By the logic of Romeo Brigade, even Lord Krishna would look like eve teaser. (रोमियो ब्रिगेड पर मेरे ट्वीट को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है। मेरी पक्ष है: रोमियो ब्रिगेड के तर्क से तो, भगवान कृष्ण भी ईव-टीज़र की तरह दिखेंगे।)

दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा-

We have grown up with legends of young Krishna teasing Gopis.The logic of Romeo squad would criminalise this.Didnt intend to hunt sentiments. (हम ऐसी किम्बदंतियां सुनकर बड़े हुए हैं कि युवा कृष्ण गोपियों को टीज़ करते थे। रोमियो दस्ते का तर्क इसे अपराध बना देगा। भावनाओं को चोट पहुंचाने का इरादा नहीं था।)

ज़ाहिर है, इन दोनों ट्वीट्स में भी आतंकवादियों के इस कुख्यात वकील और संदिग्ध पाकिस्तानी एजेंट ने यही जताने की कोशिश की कि वे लोग ही नासमझ हैं, जो उनकी बातों को समझ नहीं पा रहे और भगवान कृष्ण गोपियों को “टीज़” करते थे, इसलिए “ईव-टीज़र” कहा। “रोमियो ब्रिगेड पर मेरे ट्वीट को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है”- इसका साफ़ मतलब हुआ कि अपने छिछोरे और वाहियात विचारों की ज़िम्मेदारी वे दूसरों पर डाल रहे थे। इसी तरह “हम ऐसी किम्बदंतियां सुनकर बड़े हुए हैं कि युवा कृष्ण गोपियों को टीज़ करते थे“- इसका मतलब यह हुआ कि कृष्ण को “ईव-टीज़र” कहने को वे जस्टिफाइ करने की भी कोशिश कर रहे हैं।

इतना ही नहीं, इन ट्वीट्स का मतलब यह भी हुआ कि आजकल कई छिछोरे लड़कियों के साथ जो करते हैं, वह सही है, क्योंकि भगवान कृष्ण भी गोपियों के साथ ऐसा ही करते थे। ज़ाहिर है, भगवान कृष्ण को बदनाम करके वे आज के शैतानी इरादों वाले ईव-टीज़रों को बचाने का कुत्सित और घिनौना प्रयास भी कर रहे हैं।

बहरहाल, एक और ट्वीट उन्होंने किया, जिसमें उन्होंने अपनी मां का सहारा लेकर मुद्दे को हल्का करने की कोशिश की। राधा-कृष्ण की एक तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा-

Tho I am not religious, my mother was.I grew up listening to the folklore of lord Krishna in childhood.Painting of Radha-Krishna in our home. (हालांकि मैं धार्मिक नहीं हूं, लेकिन मेरी मां थीं। बचपन में मैं भगवान कृष्ण की कहानियां सुन-सुनकर बड़ा हुआ। मेरे घर में लगी राधा-कृष्ण की एक तस्वीर।)

आतंकवादियों के कुख्यात वकील और संदिग्ध पाकिस्तानी एजेंट प्रशांत भूषण के इस ट्वीट पर वरिष्ठ पत्रकार अभिरंजन कुमार ने उन्हें करारा जवाब दिया। दो अलग-अलग ट्वीट्स में उन्होंने लिखा-

PB, If u grew up with legends of Krishna teasing Gopis & ur mom worshiping Krishna, u shud hav asked mom why she worshiping an eve-teaser… I am sure your mom would have beaten you like Krishna beaten Narkasur, A notorious terrorist and eve-teaser of his time. (प्रशांत भूषण, अगर आप इन किंवदंतियों के साथ बड़े हुए हैं कि कृष्ण गोपियों को ‘टीज़’ करते थे और आपकी मां कृष्ण की पूजा करती थीं, तो आपको अपनी मां से पूछना चाहिए था कि वह एक ‘ईव-टीज़र’ की पूजा क्यों कर रही हैं? मुझे यक़ीन है कि इसके बाद आपकी मां ने आपकी वैसे ही पिटाई की होती, जैसे कृष्ण ने नरकासुर, अपने समय के कुख्यात आतंकवादी और ईव-टीज़र की पिटाई की थी।)

अभिरंजन कुमार के साथ ही, अन्य हज़ारों लोगों ने भी सोशल मीडिया पर आतंकवादियों के इस कुख्यात वकील और संदिग्ध पाकिस्तानी एजेंट को अपने-अपने तरीके से लपेटा है, जिसके बाद प्रशांत भूषण ने दाएं-बाएं की बातें छोड़कर सीधा माफ़ी मांग ली और ट्वीट को डिलीट कर दिया।

सवाल यह है कि प्रशांत भूषण के माफ़ी मांग लेने से विवाद को ख़त्म कर दिया जाना चाहिए? अगर हां, तो कमलेश तिवारी को माफ़ी मांगने का मौक़ा क्यों नहीं दिया गया, जिन्होंने पैगम्बर मोहम्मद के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी? क्यों कमलेश तिवारी को सीधे गिरफ़्तार कर लिया गया। एक ही तरह के अपराध में दो अलग-अलग लोगों के लिए क्या देश में दो अलग-अलग तरह के व्यवहार और कानून होने चाहिए?