व्यंग्य: “तीन तलाक” छोड़िए, “जय श्री राम” बोलिए, मौलाना स्वतः संज्ञान लेकर तलाक करा देंगे!
अभिरंजन कुमार जाने-माने पत्रकार, कवि और मानवतावादी चिंतक हैं।

बिहार के विधायक और नीतीश-मोदी सरकार में मंत्री बने खुर्शीद आलम सुपरहिट हो गए हैं। एक तरफ़, हिन्दू उनके “जय श्री राम” बोलने से इतने गदगद हैं कि अगर मोहन भागवत जी आज सरप्राइज़ एनाउंसमेंट कर दें कि अगले सरसंघचालक खुर्शीद आलम जी होंगे, तो सभी वाह-वाह कर उठेंगे, जैसे नरेंद्र मोदी जी के सरप्राइज़ देकर रामनाथ कोविंद जी को राष्ट्रपति बनाने पर वाह-वाह कर उठे थे।

दूसरी तरफ, उसी “जय श्री राम” का यह भी असर हुआ है कि इस्लाम खतरे में पड़ गया है। मुस्लिम लोग आहत हैं कि ये हमारी कोख में काफिर कैसे पैदा हो गया। कोई फतवा जारी कर रहा है। कोई उन्हें इस्लाम से बेदखल कर रहा है। कोई उनके सिर पर इनाम रखने के लिए अपनी औकात चेक कर रहा है। मसलन, अगर औकात दो कौड़ी की हुई, तो कम से कम दो करोड़ का इनाम तो रखना पड़ेगा!

लेकिन सबसे दिलचस्प वे मौलाना हैं, जो “जय श्री राम” बोलने के चलते खुर्शीद भाई का निकाह रद्द कर रहे हैं। मैं सोच रहा था कि अगर खुर्शीद भाई का निकाह रद्द हो गया, तो बेचारी बीवी का क्या होगा? एक ही राम के नाम से मियां आबाद हो जाएगा और बीवी बर्बाद हो जाएगी। मौलाना साहब, मियां को पनिशमेंट ज़रूर दो, पर बीवी पर तो रहम करो, वरना लोग फिर कहेंगे कि इस्लाम औरतों के लिए बेहद ज़ुल्मी रिलीजन है।

कई लोग यह भी कह सकते हैं कि ख़ुर्शीद आलम ने ही बीवी को तलाक देने का मन बना लिया होगा, लेकिन इस्लामिक रीति से तलाक देते तो बड़ी बदनामी होती, इसलिए हिन्दूवादी तरीका अपनाया। फिर यह भी हो सकता है कि अनेक बीवियों का सुख प्राप्त करने की हसरत रखने वाले मेरे चतुर मुस्लिम भाई बीवियों को तलाक देने के लिए “तीन बार तलाक” बोलने की बजाय तीन शब्द “जय श्री राम” बोलना शुरू कर दें।

यानी अगर खुर्शीद भाई का निकाह कैंसिल हो गया, तो मुसलमानों में “तीन तलाक” की जगह “जय श्री राम प्रथा” शुरू हो जाने का भी ख़तरा है। फिर हो सकता है कि जैसे अब तक लोग चिट्ठी से, फोन पर, एसएमएस करके, व्हाट्स अप करके तीन बार तलाक भेजते रहे हैं, वैसे ही आगे से वे तीन शब्द “जय श्री राम” लिखकर या बोलकर भेजा करेंगे और मौलाना साहब स्वतः संज्ञान लेकर उनका निकाह कैंसिल करा दिया करेंगे।

फिर मुस्लिम औरतें, जो अभी तक “तीन तलाक प्रथा” के खिलाफ अदालतों का दरवाज़ा खटखटाती रही हैं, वे “जय श्री राम प्रथा” के ख़िलाफ़ अदालतों का दरवाज़ा खटखटाएंगी। पर उन्हें इंसाफ़ मिलेगा कि नहीं- यह इस बात पर निर्भर करेगा कि केंद्र में हिन्दूवादी सरकार है या मुस्लिमवादी सरकार? अगर केंद्र में हिन्दूवादी सरकार हुई, तो “तीन तलाक” की तरह वह इसका विरोध नहीं करेगी। उल्टे समर्थन करेगी यह कहकर, कि “जय श्री राम” का जलवा कायम हो रहा है, मुसलमानों के भीतर हिन्दुत्व हिलोरें लेने लगा है, भारत में हिन्दू राज कायम हो रहा है।

लेकिन अगर मुस्लिमवादी सरकार रही, तो वह “जय श्री राम प्रथा” का समर्थन नहीं करेगी, बल्कि ग़ैर-इस्लामिक कहकर इसका विरोध करेगी। फिर पांच जजों की बेंच बनाई जाएगी, इस बात की सुनवाई के लिए, कि “जय श्री राम” – ये तीन शब्द बोलकर किसी औरत को तलाक देना कितना जायज़ या इस्लामिक है? फिर जज साहब ये पूछ सकते हैं कि “जय श्री राम” बोलने को कुरान या शरीयत के हिसाब से इस्लाम में जस्टिफाइ किया जा सकता है या नहीं? अगर यह साबित हो गया कि “जय श्री राम” बोलना गैर-इस्लामिक है, तब तो “जय श्री राम प्रथा” रद्द कर दी जाएगी और अगर यह गैर-इस्लामिक साबित नहीं हो पाया, तो “जय श्री राम प्रथा” बनी भी रह सकती है।

बहरहाल, हिन्दुओं के उत्साह और मुसलमानों की खलबली पर अपने खुर्शीद भाई मजे ले रहे हैं। कल तक उन्हें सिर्फ़ बिहार में दो-चार लोग जानते थे, आज पूरा देश जान गया। अखबार-टीवी सब खुर्शीद भाई की महिमा से रंगे पड़े हैं। सोशल मीडिया पर भी बड़े-बड़े तीसमार खां उनके समर्थन या विरोध में पोस्ट लिखकर अपने सामुदायिक दायित्व का बखूबी निर्वाह कर रहे हैं। जो हिन्दू हैं, वे उनका समर्थन करके हिन्दुत्व को बढ़ावा दे रहे हैं। जो मुस्लिम हैं, वे उनका विरोध करके इस्लाम की रक्षा कर रहे हैं।

इस बीच, माननीय नीतीश कुमार जी को भी एक बार फिर से “चंदन विष व्यापत नहीं, लिपटत रहत भुजंग” साबित करने का मौका मिल गया है। सुना है कि उन्होंने खुर्शीद भाई से कहा कि माफी मांग लो, तो मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिना देरी के खुर्शीद भाई ने इन शब्दों में माफी भी मांग ली- “अगर मैंने जय श्री राम का नारा लगाकर जनभावना को आहत किया है, तो इसके लिए माफी मांगता हूं।”

यानी नीतीश कुमार जी ने एक बार फिर से साबित कर दिया कि “सांप्रदायिकों” की गोदी में बैठकर भी वे “सेकुलर” बने हुए हैं, जैसे “जंगलराज” का पल्लू थामकर भी वे “मंगलराज” चला रहे थे। यानी “भुजंग” से लिपटे रहकर भी “चंदन” बने हुए हैं। दूसरी तरफ़, बीजेपी अभी नई-नई प्राप्त सत्ता के उमंग में इस कदर लोट-पोट हुई पड़ी है कि उसे अभी इस बात पर ध्यान देने की फुरसत ही नहीं है कि उसके राज में “जय श्री राम” बोलने की वजह से एक नेता को माफ़ी मांगनी पड़ गई और अजीब यह कि जिस शख्स ने उसे माफ़ी मांगने को कहा, वही उसका नया-नया नेता है।

दरअसल, सबका अपना-अपना मौसम विज्ञान है। नीतीश जी कितने बड़े मौसम वैज्ञानिक हैं, यह तो पिछले चार साल में चार बार प्रमाणित हो चुका है, लेकिन नीतीश जी से प्रशिक्षण लेकर अपने खुर्शीद भाई भी कितने बड़े मौसम वैज्ञानिक बन चुके हैं, ज़रा इसपर भी गौर करें। भाजपा की सरकार में बिना “जय श्री राम” बोले उन्हें कुर्सी मिलती क्या? और कुर्सी नहीं मिलती, तो एक और मुसलमान पीछे नहीं रह जाता क्या? इसलिए खुर्शीद भाई ने ज़बर्दस्त मौसम वैज्ञानिक होने का परिचय देते हुए पहले “जय श्री राम” बोला। हिन्दू खुश। और जब कुर्सी मिल गई, तो “जय श्री राम” बोलने के लिए माफी भी मांग ली। मुस्लिम भी खुश।

जहां तक भाजपा का सवाल है, उसका अपना मौसम विज्ञान है। नीतीश कुमार जी जब तक उसके साथ नहीं थे, तब तक उनका डीएनए ख़राब था। अब साथ आ गए हैं, तो डीएनए में ईमानदारी ही ईमानदारी है, ऊपर से “ज़ीरो टॉलरेंस” भी घुस गया है। इसलिए, अब “जय श्री राम” बोलवाने और माफी मंगवाने का खेल चलता रहेगा।

उधर, भगवान श्री राम भी अपने नाम के अलग-अलग परिणाम पर चकित होंगे। एक दिन सोचते होंगे कि मेरे नाम में ऐसा क्या है कि इसे बोलकर ग़लत लोग भी सही हो जाते हैं। दूसरे दिन सोचते होंगे कि मेरे नाम में ऐसा क्या है कि इसे लेने पर लोगों को माफी मांगनी पड़ जाती है। नारायण…! नारायण…!!

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