कोर्ट अगर संविधान की ‘मनमानी व्याख्या’ करे, तो संसद निभाए उस व्याख्या की समीक्षा का दायित्व!
On : --आईपीसी की धारा 497 को निरस्त कर व्यभिचार को अपराध के दायरे से बाहर करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मैंने खुलकर अपनी असहमति जताई थी। इसी संदर्भ में यह सवाल भी उठाया कि अगर सुप्रीम कोर्ट को कानून बनाने का…


