डीयू में जेंडर न्यूट्रल कानूनों की ज़रूरत पर मंथन, सुप्रीम कोर्ट के हालिया फ़ैसलों की रही गूंज

डीयू में जेंडर न्यूट्रल कानूनों की ज़रूरत पर मंथन, सुप्रीम कोर्ट के हालिया फ़ैसलों की रही गूंज

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22 नवंबर, दिल्ली। टीम बहस लाइव। सितंबर महीने में सुप्रीम कोर्ट के एक के बाद एक तीन फैसलों से देश अब तक उद्वेलित है। जहां केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत देने से जुड़े…

लैंगिक समानता की सतही व्याख्या का नतीजा है सबरीमाला मंदिर विवाद

लैंगिक समानता की सतही व्याख्या का नतीजा है सबरीमाला मंदिर विवाद

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आप जानते हैं? मेरे देश की महिलाओं को जहां सचमुच न्याय की ज़रूरत है, जैसे कि #MeToo और बलात्कार जैसे मामलों में, वहां मेरे देश की अदालत सबूत मांगेगी और सबूत न दे सकने पर पीड़ित महिलाओं को बिना इंसाफ़ दिए अपने…

जस्टिस दीपक मिश्रा ने किया निराश, जस्टिस रंजन गोगोई जगाएं नई आशा!

जस्टिस दीपक मिश्रा ने किया निराश, जस्टिस रंजन गोगोई जगाएं नई आशा!

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जस्टिस दीपक मिश्रा संभवतः भारत के इतिहास के सबसे विवादास्पद चीफ जस्टिस रहे। सुप्रीम कोर्ट के अंदर क्या खेल चल रहा था, यह तो नए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई सहित उनके ख़िलाफ़ प्रेस कांफ्रेंस करने वाले चार जज बेहतर जानते होंगे, लेकिन…

महिलाओं की सारी समस्याएं सुलझ चुकीं, केवल सेक्स और पूजा का अधिकार ही बाकी था!

महिलाओं की सारी समस्याएं सुलझ चुकीं, केवल सेक्स और पूजा का अधिकार ही बाकी था!

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मुझे माफ़ करना दोस्तो। पिछले कुछ दिनों में कुछ ज़्यादा ही अपच सच बोल चुका हूं, इसलिए एक और बोल दूं तो अधिक फ़र्क़ नहीं पड़ेगा। इस देश में जेंडर इक्वैलिटी की लड़ाई दिशा भटक चुकी है। वामपंथी फेमिनिस्टों के लिए जेंडर…

कोर्ट अगर संविधान की ‘मनमानी व्याख्या’ करे, तो संसद निभाए उस व्याख्या की समीक्षा का दायित्व!

कोर्ट अगर संविधान की ‘मनमानी व्याख्या’ करे, तो संसद निभाए उस व्याख्या की समीक्षा का दायित्व!

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आईपीसी की धारा 497 को निरस्त कर व्यभिचार को अपराध के दायरे से बाहर करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मैंने खुलकर अपनी असहमति जताई थी। इसी संदर्भ में यह सवाल भी उठाया कि अगर सुप्रीम कोर्ट को कानून बनाने का…

धारा 497: एक त्रुटिपूर्ण कानून पर सुप्रीम कोर्ट का त्रुटिपूर्ण फ़ैसला!

धारा 497: एक त्रुटिपूर्ण कानून पर सुप्रीम कोर्ट का त्रुटिपूर्ण फ़ैसला!

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शिकारी आएगा, जाल बिछाएगा, दाना डालेगा, पर तुम उसमें फंसना नहीं। बचपन में पढ़ी गई शिकारी और कबूतरों की कहानी का यह सार अपने दिमाग में फिर से उतार लीजिए और अपने जीवनसाथी को भी न फंसने के लिए आगाह कीजिए। व्यभिचार…

समलैंगिकता को जायज़ ठहराने के फैसले की समीक्षा हो, वरना कल पछताना पड़ेगा!

समलैंगिकता को जायज़ ठहराने के फैसले की समीक्षा हो, वरना कल पछताना पड़ेगा!

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वो दिन दूर नहीं, जब एक लड़का एक लड़के को लेकर या एक लड़के के लिए (या एक लड़की एक लड़की को लेकर या एक लड़की के लिए) घर से भाग जाएगा। फिर मां-बाप थाने में उसको अगवा करने/बहकाने/फुसलाने जैसी रिपोर्ट लिखाएंगे।…

समलैंगिकों पर फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने नहीं किया भावी ख़तरों का आकलन

समलैंगिकों पर फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने नहीं किया भावी ख़तरों का आकलन

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बालिग समलैंगिकों को सहमति से संबंध बनाने का अधिकार मिलना सतही तौर पर प्रगतिशीलता और मानवाधिकारों का झंडा बुलंद करने वाला फैसला दिखाई दे सकता है, लेकिन जितना मैं समझ पा रहा हूं, उसके मुताबिक, ऊपरी तौर पर सही दिखने वाले इस…

कोर्ट और कांग्रेस का रिश्ता देख याद आ जाती है साधु और बिच्छू की कहानी!

कोर्ट और कांग्रेस का रिश्ता देख याद आ जाती है साधु और बिच्छू की कहानी!

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कांग्रेस ने पहले न्याय और लोकतंत्र का खूब मखौल उड़ाया है, इसका मतलब यह नहीं कि न्याय मांगने और हासिल करने का उसे अधिकार नहीं है। लेकिन उसे हड़बड़ाना नहीं चाहिए और कोर्ट पर पूरा भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि उसके सामने ऐसे…

चीफ जस्टिस महाभियोग मामला: इन 10 बिन्दुओं से एक बार फिर खुल गई कांग्रेस की मलिन राजनीति की पोल

चीफ जस्टिस महाभियोग मामला: इन 10 बिन्दुओं से एक बार फिर खुल गई कांग्रेस की मलिन राजनीति की पोल

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कांग्रेस के दो राज्यसभा सांसद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव को उपराष्ट्रपति द्वारा खारिज किए जाने को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में गए थे। महाभियोग प्रस्ताव पर छह दलों के 64 सांसदों के हस्ताक्षर थे,…